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श्री साई नाथ मंदिर , सुमेरपुर
साई गार्डन, सुमेरपुर
जवाई बांध , सुमेरपुर
सुमेरपुर शहर का दृश्य
मारवाड़ का सिंहद्वार, सुमेरपुर
रेलवे स्टेशन, जवाईबांध, सुमेरपुर

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सुमेरपुर शहर का इतिहास



लगभग सौ वर्ष पूर्व जोधपुर राज्य के तत्कालीन महाराजा सुमेरसिंहजी के नाम इनके संरक्षक सर प्रतापसिंहजी ने सुमेरपुर की स्थापना करवाई। कुछ दिनों बाद अंग्रेजी शासन द्वारा प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान तुर्की कैदियों को बंदी बनाकर यहाँ रखा तथा नगरवासियों को सुमेरपुर छोड़ना पड़ा। इसके बाद महाराजा उम्मेदसिंहजी द्वारा जवाईबांध का निर्माण करवाया गया। सन् 1956 में बांध पूर्ण बनने के बाद सुमेरपुर नगर तीव्र गति से विकास की ओर अग्रसर हुआ तथा राज्य व देश के लोगों का रोजगार के उद्देश्य से सुमेरपुर में जुड़ाव हुआ। इसके बाद सुमेरपुर नगर पश्चिमी राजस्थान में प्रमुख व्यापारिक केंद्र के रूप में पहचान बनाकर राज्य की अग्रणी मंडियों में गिना जाने लगा। इस नगर की जननी उंदरी व अग्रज के रूप में शिवगंज छावनी होने से यहां की ऐतिहासिक पृष्टभूमि अतीत के मंजर को दर्शाती है।



वर्तमान में शिवगंज वस्त्र, रेडीमेड, मिठाई, मेडिकल, ज्वैलर्स व ऑयल मिलों व साल्वेंट प्लांट के कारण सुमेरपुर से जुड़कर राज्य भर में प्रमुख व्यापारिक केंद्र के रूप में ख्याति प्राप्त है। वही सुमेरपुर अनाज, किराणा, लोहा, हार्डवेयर, टिम्बर, ऑटोमोबाइल व ऑयल दाल मिलों सहित कुटीर उद्योग के रूप में देशभर में अपना नाम दर्ज करा चुका है। समीप के कोलीवाड़ा ग्राम देश में स्वर्ण रजत नक्काशी के लिए प्रसिद्ध हैं। वहीं गलथनी गांव के सपूतों का शौर्य का देश के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में नाम अंकित है। पास में 8 किमी. दूर पर बने जवाईबांध स्टेशन अंग्रेजी शासन का प्राचीन स्टेशन रहा है। यहां के भामाशाह समाज सेवक व प्रवासी लोगों के सहयोग में शिक्षा चिकित्सा पर्यावरण में विशेष विकास, नगर के गौरवमय इतिहास को उजागर करता हैं।



यहां की ऐतिहासिक यात्रा के सौ वर्ष पूर्ण होने पर शहरवासियों द्वारा नगर के इतिहास में एक ओर अध्याय जोड़ा गया वह है "शताब्दी दिवस महोत्सव" जिसे देखकर लगा कि सुमेरपुर स्वर्ग से सुंदर है। इस तरह के इतिहास के बिखरे मोतियों की माला "सुमेरपुर की गौरवगाथा"(शताब्दी दिवस विशेषांक)बनाने का प्रयास किया है। मुझे आशा ही नहीं बल्कि पूर्ण विश्वास है कि इसे पढ़कर पाठक इतिहास को संजोकर रखेंगे।

धन्यवाद !

History Provided By पं. सुरेश कुमार गौड़

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